माता-पिता की बातें लिखकर साझा करना
वे बातें जो बोलने पर जल्दी उलझ जाती हैं
यह बिना बोले, बारी-बारी से लिखकर की जाने वाली बातचीत है।
इस कागज़ का विषय 「माता-पिता」 है। ये ऐसी बातें हैं जो आवाज़ मिलते ही जल्दी उलझ जाती हैं, इसलिए सिर्फ़ लिखकर रखने पर दोनों की बातें अंत तक बची रहती हैं।
ऐसे करें
- तय करो कि कोई आवाज़ नहीं निकालोगे।
- ① से शुरू करके क्रम से पढ़ो और बाईं·दाईं पंक्तियों में बारी-बारी से एक-एक पंक्ति लिखो।
- जब सामने वाला लिख रहा हो, तो जल्दी मत कराओ और इंतज़ार करो।
- सब लिख लेने के बाद, शुरुआत से साथ में पढ़ो।
कब · किसके साथ
इसे आमने-सामने बैठे दो लोग करते हैं। चाहे दोनों के माता-पिता एक ही हों, या दोनों एक-दूसरे के माता-पिता के बारे में बात करें—दोनों तरह से अच्छा है।
「माता-पिता」को देखने वाले तीन सवाल
- माता-पिता को याद करते ही सबसे पहले कौन-सा दृश्य तुम्हारे मन में आता है?
- क्या ऐसी कोई बात है जिसे उस समय नहीं समझे थे, लेकिन अब अलग तरह से देखते हो?
- अगर कोई ऐसी बात है जो तुम अभी तक कह नहीं पाए हो, तो वह क्या है?


