नफ़रत को शब्दों में बाँटना
नापसंद करने का एहसास सिर्फ़ कागज़ पर रखना
यह बिना बोले, बारी-बारी से लिखकर की जाने वाली बातचीत है।
इस कागज़ का विषय 「नफ़रत」 है। हम यह नहीं कहते कि नफ़रत मिटा दो — हम देखते हैं कि वह एहसास कहाँ से आया और कैसे सुलझा।
ऐसे करें
- तय करो कि कोई आवाज़ नहीं निकालोगे।
- ① से शुरू करके क्रम से पढ़ो और बाईं·दाईं पंक्तियों में बारी-बारी से एक-एक पंक्ति लिखो।
- जब सामने वाला लिख रहा हो, तो जल्दी मत कराओ और इंतज़ार करो।
- सब लिख लेने के बाद, शुरुआत से साथ में पढ़ो।
कब · किसके साथ
इसे आमने-सामने बैठे दो लोग करते हैं। जो बातें बोलते समय आवाज़ ऊँची हो जाती है, उनके लिए यह खास तौर पर अच्छी है।
「नफ़रत」को देखने वाले तीन सवाल
- नफ़रत महसूस होने पर तुम क्या करते हो?
- क्या कभी वह भावना दूर हुई है?
- क्या किसी को तुमसे भी ऐसी परवाह मिली होगी?


