रेखाओं से आज के मन को बनाना
आज के मन को बिना रंग, केवल रेखाओं से
यह वह कागज़ है जिस पर आज के मन को बिना आकार या रंग के, केवल रेखाओं की दिशा और मोटाई से उतारा जाता है।
तुमने क्या बनाया, यह समझाना ज़रूरी नहीं है, इसलिए हाथ जहाँ जाए, रेखाएँ वहीं रहने दो।
दूसरी चित्र गतिविधियों में ठोस आकार बनाए जाते हैं, लेकिन यहाँ रेखा खुद मन बन जाती है।
ऐसे करें
- एक पेंसिल या पेन चुनकर हाथ में पकड़ो।
- चुपचाप महसूस करो कि अभी तुम्हारा मन तेज़ी से बह रहा है या धीरे-धीरे।
- उस एहसास का अनुसरण करते हुए रेखाएँ बनाओ। सीधी रेखाएँ भी अच्छी हैं और काँपती हुई रेखाएँ भी।
- सारी रेखाएँ खींच लेने के बाद कागज़ को थोड़ा दूर रखकर देखो।
कब · किसके साथ
यह उन दिनों के लिए है जब महसूस हो, पर उसे शब्दों में समझाना मुश्किल हो। इसे अकेले के समय में करके देखो।


