चित्रों के ज़रिए मिलना
जो मन शब्दों में नहीं कह पाए, उसे उँगलियों से
यह एक खाली कागज़ है, जिस पर एक भी रेखा नहीं है।
यह वह जगह है जहाँ तुम उस मन को, जिसे शब्दों में ढालते-ढालते रुक गए थे, हाथ के मनमुताबिक चित्र बना सकते हो।
चित्र बिल्कुल वैसा बनाने की ज़रूरत नहीं है, इसलिए बेझिझक इसे भर दो।
ऐसे करें
- कागज़ फैलाओ और हाथ में आने वाली कोई पेंसिल या रंगीन पेंसिल चुनो।
- अभी मन में जो उभर रहा है, उसे वैसे ही चित्र में उतारो। उसका कोई आकार न भी हो, तो कोई बात नहीं।
- चित्र पूरा करने के बाद उसे कुछ देर देखो और अगर कोई साथ हो, तो उसे यह भी बता सकते हो कि तुमने क्या बनाया है।
कब · किसके साथ
यह उन दिनों के लिए अच्छा है जब शब्द आसानी से नहीं निकलते। अकेले चुपचाप बैठना भी अच्छा है और दो लोग आमने-सामने बैठकर एक-एक पन्ने पर चित्र बनाएँ, तब भी अच्छा लगता है।


