न भेजी जाने वाली चिट्ठी
ऐसी चिट्ठी, जिसे भेजना नहीं है यह जानते हुए लिखते हो
जो बात आखिर तक कह नहीं पाए, उसे यह जानते हुए लिखो कि यह चिट्ठी भेजनी नहीं है।
इसे पाने वाला कोई नहीं है, इसलिए वाक्यों को सँवारने की भी कोई ज़रूरत नहीं।
इसलिए इसमें न रेखाएँ हैं, न खाने—पूरा कागज़ खाली छोड़ा गया है।
ऐसे करें
- मन ही मन तय कर लो कि यह बात किससे कह रहे हो।
- पहला वाक्य जैसे मन करे, वैसे शुरू करो। अभिवादन से शुरू करना भी ज़रूरी नहीं है।
- लिखते-लिखते रुक जाओ, तो भी ठीक है; अंत न करो, तो भी कोई बात नहीं।
- लिखा हुआ कागज़ वैसे ही छोड़ दो या मोड़कर रख दो—दोनों ठीक हैं।
कब · किसके साथ
अकेले बिताए समय के लिए अच्छी है। जिस दिन कोई बात मन में बहुत समय से अटकी हो, उस दिन एक पन्ना काफ़ी है।


